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जीवन-चलना
शायद ये तुम्हारा आखरी सफर हो, पर मौत से तुमको डरना नही, मंजिल तुम्हारी दूर ही सही, पर पथ से तुमको डगना नही, सफर मे हो चाहे कितनी ही मुसीबते, पग-पग पर हो भिन्न-भिन्न भूल-भुलैया, पर तुमको इनमे फसना नही, देख कर मुठ्ठी भर सुखो को तुम्हे यहाँ वहाँ रुकना नही, मत गिनो तुम कितना चल आए, मत गिनो तुमने कितने ठोकर खाए, तुम बस चलते जाओ, बस अपनी मंजिल को पाओ, मंजिल पर रुको , खोश हो जाओ, पर तुमको फ़िर चलना होगा, नए मंजिल की और बढ़ना होगा, क्योंकी मनुष्य का जीवन चलने के लिए है, नए-नए मंजिलों के लिए है, नए-नए रास्तों के लिए है......... muskaan
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